भूपालसागर। इस बार गेहूं एवं सरसों की बंपर पैदावार की उम्मीद है । इसी कारण क्षेत्र में किसानों को यूरिया खाद के लिए लंबी लंबी लाइने लगानी पड़ रही है । कभी खाद का वितरण पुलिस की निगरानी में होता है , तो कभी विभाग के अधिकारियों की निगरानी में होता है । कहने मात्र को विभाग की निगरानी है , लेकिन खाद की आपूर्ति पैदावार के हिसाब से नहीं हो पा रही है । इसके साथ ही किसानों को बहुत सी जगह अधिक पैसा कालाबाजारी करके खाद को खरीदना पड़ रहा है । विगत 1 महीने से खाद की किल्लत की समस्याएं बनी हुई है, फिर भी विभाग चुप्पी साधे हुए हैं । विभागीय के आला अधिकारियों से संपर्क करें , तो उनका यही जवाब रहता है । आ रहा है हो जाएगी आपुर्ती , लेकिन इस पूरे महीने में कहीं पूर्ति होती नजर नहीं आ रही है और इसका सीधा असर गेहूं एवं अन्य फसलों पर पढ़ने वाला है। मंगलवार को सहकारी समिति आकोला मे 670 बेग आये है, जहां पांच हजार बेग की आवश्यकता है वहां मात्र 670 बेग लाये गये है। ऊंट के मुंह मे जीरा के समान प्रतीत हो रहा है। चित्तौड़गढ़़ जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है जहां आसपास छोटेबड़े लगभग 50 कस्बे लगते है, जो आकोला पर ही निर्भर है। प्राप्त सूत्रों के अनुसार जांच करने पर पता चला कि चित्तौड़गढ़़ की सबसे बड़ी सहकारी समिति वहीं जिला व विधानसभा मे सबसे बडा खाद डीलर भी आकोला मे ही है। वहां मात्र 670 बेग की सप्लाई ऊंट के मुंह मे जीरा वाली चरितार्थ हो रही हैं। मंगलवार को सुबह से ही लम्बी कतारों मे महिलाएं पुरुषों को देखा गया। खाद खरीदने आये किसानों की मोटरसाइकिलों से आम रास्ता जाम हो गया। आकोला के इस मुख्य मार्ग का जाम लगना भी खाद का मारामारी ही है। भूखे प्यासे किसानों को सुबह से ही लाइनों मे  देखा गया जहां 670 बेग खत्म होते ही लाइन मे लगे किसानों को बैरंग मायूसी के साथ खाली हाथ लोटना पडा।