चित्तौड़ी आठम महोत्सव समिति के अमन गौड़ ने बताया कि स्वामी विवेकानंद जन्म जयंती पर चित्तौड़ का महोत्सव समिति द्वारा स्वामी विवेकानंद जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया।

समिति के अध्यक्ष मुकेश नाहटा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ओजस्वी विचारक भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक दर्शन को संपूर्ण विश्व में गौरव दिलाने वाले हमारे युवाओं के प्रेरणा स्रोत थे जिनका नाम ही मन में श्रद्धा और स्फूर्ति दोनों का संचार कर दे ऐसे महान संत थे। सन 1993 में स्वामी विवेकानंद अमेरिका के शिकागो शहर पहुंचे जहाँ संपूर्ण विश्व के धर्मों का सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में सभी धर्म गुरुओं ने अपने-अपने धर्म पुस्तकें रखी थी व हमारे देश के धर्म के वर्णन के लिए रखी गई एक छोटी सी किताब थी  श्रीमद्भगवद्गीता। जिसका कुछ लोग मजाक बना रहे थे परंतु जैसे ही स्वामी विवेकानंद की बारी आई और उन्होंने अपना भाषण देने की शुरुआत की वैसे ही सारा हाॅल तालियों की आवाज से गुंज गया क्योंकि उन्होंने अपने भाषण में मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों कहा। इसके बाद उनके द्वारा दिए गए धर्म के वर्णन से सभी लोग अभिभूत हो गए और हमारी धार्मिक किताब श्रीमद भगवत गीता का सभी ने लोहा माना। स्वामी विवेकानंद ने कहा कि हिंदू समाज का एक व्यक्ति भी कम होना अपितु हिंदू समाज का एक व्यक्ति कम होना नहीं बल्कि एक शत्रु का बढ़ जाना है। हम सभी को भी स्वामी विवेकानंद के द्वारा बताए गए मार्ग पर चलना चाहिए। कार्यक्रम में विजय वैष्णव, रवि बैरागी, अमन गौड़, चिरंजीव सिंह सोलंकी, विपुलसिंह राणावत, कुलदीप पारीक, देवेन्द्रसिंह, नरेश शर्मा, राहुल सोनी, प्रकाश जोशी, रौनक सोनी, विजय सोनी, शुभम सेन, राजवीर कसेरा, गौरव आचार्य, सिद्धार्थ पटवा, अर्जुन जोशी, अजय सोनी, मदन कीर, संजय सेन, मोहित बादल आदि कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।